हिम न्यूज़, शिमला :अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश की प्रदेश मंत्री नैंसी अटल ने बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। हिमाचल प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 11,716 तथा गैर-शिक्षकों के 6,328 पद रिक्त पड़े हैं, जो सरकार की उदासीनता को स्पष्ट दर्शाते हैं। जब विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी?
प्रदेश मंत्री नैंसी अटल ने कहा कि बीते तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु कोई ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाया है। स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई विद्यालय एक या दो शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं, जिससे शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। गैर-शिक्षकीय स्टाफ की कमी से प्रशासनिक कार्य भी बाधित हो रहे हैं।
नैंसी अटल ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश विद्यालय शिक्षा बोर्ड को सुदृढ़ करने के बजाय प्रदेश के विद्यालयों को सीबीएसई के अधीन कर रही है, जो कहीं न कहीं अपनी जिम्मेदारी से भागने जैसा प्रतीत होता है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को मजबूत करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने, पारदर्शिता बढ़ाने और नई शैक्षणिक योजनाएं लागू करने की आवश्यकता है, न कि उसे कमजोर करने की।
अभाविप का मानना है कि शिक्षा केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस नीतियों, समयबद्ध नियुक्तियों और प्रदेश के अपने शिक्षा तंत्र को सशक्त बनाने से मजबूत होती है। यदि सरकार वास्तव में विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो तत्काल प्रभाव से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारंभ करे तथा स्कूल शिक्षा बोर्ड को आधुनिक और सक्षम बनाए।
अभाविप चेतावनी देती है कि यदि प्रदेश सरकार शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लेती, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। विद्यार्थी परिषद छात्रहितों की रक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहेगी।