शिक्षा, कृषि व पशुपालन ऋण को भी प्राथमिकता दें बैंक: डीसी कांगड़ा

हिम न्यूज़,धर्मशाला,: उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बैंकों से शिक्षा, कृषि एवं अन्य उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण वितरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही ढगवार दुग्ध प्लांट भी शुरू होने जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। ऐसे में बैंकों को गौ-पालन जैसे क्षेत्रों में भी किसानों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध करवाना चाहिए।

यह विचार उन्होंने आज जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार समिति, जिला समन्वय समिति तथा जिला स्तरीय समीक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में वर्ष 2025-26 की वार्षिक ऋण योजना के अंतर्गत दिसंबर 2025 तक की उपलब्धियों एवं प्रगति की समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने सभी बैंकों को ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए तथा शिक्षा और कृषि ऋण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।

बैठक का संचालन करते हुए अग्रणी जिला प्रबंधक कांगड़ा पृथ्वी रणवीर ने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 8945.20 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले दिसंबर 2025 तक बैंकों ने 6677.01 करोड़ रुपये का ऋण वितरण कर 74.64 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया है।

उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 तक जिले में बैंकों द्वारा कुल 48986.37 करोड़ रुपये जमा किए गए तथा 12779.68 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जिससे ऋण-जमा अनुपात 26.09 प्रतिशत रहा। इस अनुपात को बढ़ाने के लिए बैंकों को विशेष प्रयास करने की आवश्यकता बताई गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर तिमाही तक प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में 53.61 प्रतिशत तथा गैर-प्राथमिकता क्षेत्र में 308.32 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 तक कृषि क्षेत्र में 1755.42 करोड़ रुपये तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में 3787.98 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड योजना में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। सभी बैंक शाखाओं को शेष किसानों को केसीसी जारी करने तथा स्वयं सहायता समूह एवं संयुक्त देयता समूह को ऋण देने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

इस अवसर पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक हिमांशु साहू ने किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों के लिए ऋण प्रवाह को सुदृढ़ करने हेतु ई-नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद, ई-किसान उपज निधि तथा क्रेडिट गारंटी योजना जैसी डिजिटल पहलों की जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कोल्ड चेन और भंडारण अवसंरचना विकसित करने पर बल दिया।

इसके अतिरिक्त पीएनबी आरसेटी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रशिक्षुओें को ऋण उपलब्ध करवाने पर भी चर्चा की गई।

बैठक में आरबीआई शिमला के प्रतिनिधि तरुण चैधरी, पीएनबी धर्मशाला के उपमंडल प्रमुख भरत कैलाश चंद्र ठाकुर, आरसेटी निदेशक मदन लाल, जीएम डीआईसी ओपी जरियाल, उप निदेशक कृषि कुलदीप धीमान, जिला विकास अधिकारी ग्रामीण विकास भानु प्रताप सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।