मुख्यमंत्री भाजपा फोबिया से ग्रस्त : रणधीर शर्मा

हिम न्यूज़, शिमला। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पूरी तरह से “भाजपा फोबिया” से ग्रस्त हो चुके हैं। प्रदेश में कोई भी मुद्दा सामने आए, मुख्यमंत्री बिना तथ्य के भारतीय जनता पार्टी को ही दोषी ठहराने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक गैर-सरकारी संस्था द्वारा मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे के आधार पर प्रकाशित रिपोर्ट में उनकी संपत्ति लगभग 7.80 करोड़ रुपये बताई गई और उन्हें उत्तरी भारत के सबसे संपन्न मुख्यमंत्रियों में शामिल किया गया। भाजपा ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई, बल्कि उन्हें शुभकामनाएं दीं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि मुख्यमंत्री इस रिपोर्ट के लिए भी भाजपा को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।

 

रणधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा का केवल इतना कहना है कि मुख्यमंत्री अपनी व्यक्तिगत संपत्ति के साथ-साथ प्रदेश की जनता और हिमाचल की आर्थिक स्थिति की भी चिंता करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रदेशवासियों पर लगातार नए करों और शुल्कों का बोझ डाला है, जबकि दूसरी ओर फिजूलखर्ची और भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि जनता महंगाई, आर्थिक दबाव और सरकार की नीतियों से परेशान है, लेकिन मुख्यमंत्री का ध्यान केवल अपनी राजनीतिक छवि बचाने पर केंद्रित है।

 

भाजपा मीडिया प्रभारी ने कहा कि पंचायत राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी पराजय के बाद मुख्यमंत्री पूरी तरह से बौखला गए हैं। इसी बौखलाहट में वे संवैधानिक पदों पर चुने गए जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। यह न केवल उन जनप्रतिनिधियों का बल्कि उन्हें चुनने वाली जनता का भी अपमान है और मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

 

रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि “जो बिकने वाले हैं, वे बिक जाएं।” उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं ऐसा कह रहे हैं तो इसका सीधा अर्थ है कि वे अपनी ही पार्टी के नेताओं और विधायकों की निष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री को अपनी ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों का सार्वजनिक रूप से अपमान करने से बचना चाहिए।

 

उन्होंने मुख्यमंत्री के इस दावे को भी निराधार बताया कि भाजपा के विधायक कांग्रेस में आना चाहते हैं। रणधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा के विधायक जनता की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री या मंत्रियों से मिलते हैं तो वह उनका लोकतांत्रिक दायित्व है। इसका अर्थ कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा नहीं लगाया जा सकता। भाजपा के कार्यकर्ता और विधायक राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति समर्पित हैं और पार्टी छोड़ने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

 

रणधीर शर्मा ने कहा कि आज वास्तविकता यह है कि कांग्रेस के भीतर निराशा का वातावरण है और अनेक कार्यकर्ता तथा नेता भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व से प्रभावित होकर भाजपा का दामन थामना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में जनता कांग्रेस सरकार को स्पष्ट संदेश दे चुकी है और यदि मुख्यमंत्री अभी भी भ्रम में हैं तो आगामी विधानसभा चुनावों में प्रदेश की जनता उन्हें इसका स्पष्ट उत्तर देगी।